blogid : 3487 postid : 76

क्या एशियन गेम्स में भी हासिल होगा 30 का आकड़ा

Posted On: 2 Nov, 2010 sports mail में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Asian_Games_Order_of_Merit_1951-2010हाल में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों से पूर्व हमने दो लक्ष्य रखे थे. पहला यह कि हम इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में कम से कम 91 पदक जीतेंगे और दूसरा कि हमारी कोशिश पदक तालिका में दूसरे नम्बर पर रहने की होगी. खेलों खत्म हुए और हमने दोनों लक्ष्य हासिल किया. जहां हमने खेलों में 101 पदक जीतें वहीं इंग्लैंड को पछाड़ते हुए हम दूसरे पायदान पर रहे.

लेकिन अब डगर कठिन हो गई हैं क्योंकि 10 दिनों में शुरू हो रहे हैं 16वें एशियाई खेल. एशियाई खेल यानि एशियन गेम्स “एक बहुराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता” जहां दिखेगा एशियन चीतों का जोश.

लेकिन क्या राष्ट्रमंडल खेलों की तरह एशियन गेम्स में भी भारत कामयाबी दोहरा पायेगा. अगर हम तथ्य देखें तो यह पता चलता है कि भले ही हमने राष्ट्रमंडल खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया हो लेकिन जब बात एशियन गेम्स या ओलंपिक की आती है तो हम काफ़ी पीछे रह जाते हैं. पिछले राष्ट्रमंडल खेलों में हमने 22 स्वर्ण पदक जीते और पदक तालिका में हमारा स्थान चौथे रहा. लेकिन एशियन गेम्स में यह संख्या घटकर 10 स्वर्ण पदक पर आ गई थी और हमारा स्थान भी आठवां रहा. यह तथ्य केवल 2006 के खेलों पर ही लागू नहीं हैं बल्कि 2002 के मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में भी हमने 30 स्वर्ण पदक जीते थे और हमारा स्थान भी पांचवा था लेकिन एशियन गेम्स में 10 स्वर्ण के साथ आठवें स्थान पर रहें.

बात यहां केवल पदक और पदक तालिका में स्थान की नहीं हो रही है बल्कि बात यह है कि क्यों हम राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता को एशियन गेम्स में दोहरा नहीं पाते हैं? जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में जहां 71 देश भाग लेते हैं तो वहीं एशियन गेम्स में यह संख्या केवल 45 हैं. तब भी ऐसा क्यों?

Asian Games 2010एशियन गेम्स में कम पदक जीतने का मुख्य कारण है चीन, जापान, कजाखिस्तान, उजबेकिस्तान और कोरियाई देश. इस बार के राष्ट्रमंडल खेलों में हमने 38 स्वर्ण पदक जीते जिसमें से शूटिंग और कुश्ती में ही हमने 24 स्वर्ण पदक जीते. लेकिन जब हम एशियन गेम्स की बात होती है तो इन दो खेलों में दक्षिण कोरियाई पहलवानों और चीन शूटरों का वर्चस्व रहा है. पिछले एशियन गेम्स में चीन ने तो 27 स्वर्ण पदक केवल शूटिंग में जीते थे. इसके अलावा मुक्केबाजी में उजबेकिस्तान के मुक्केबाजों का जवाब नहीं और जब भारत इन देशों के खिलाडियों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है तो उसको स्वर्ण जीतने में मुश्किल होती है.

लेकिन शायद इस बार इसमें परिवर्तन आएं, जिसके संकेत हमें पिछली कुछ अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं से मिलने लगे है. जहां हमने बेहतरीन प्रदर्शन किया और कई पदक अपने नाम किए. इसे देख यह कहना कठिन नहीं है कि ‘भले 30 नहीं लेकिन 20 का आकड़ा तो भारत इस बार ज़रूर हासिल कर लेगा.’



Tags:                             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

lakra के द्वारा
November 19, 2010

It is sad to see that Indian team is not getting gold medals, of course, there are many more days to come but certainly we are way behind from other nations in Asia. This makes us to think that we are wrong somewhere, we are second in number in population. we can get many talented people only honest and responsible procedures should be done, but can we do so?


topic of the week



अन्य ब्लॉग

  • No Posts Found

latest from jagran